आनंदसेन के आने से रुदौली में आसान हो जायेगी भाजपा की राह

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अयोध्या जिले में वैसे तो 5 विधानसभा सीटें हैं लेकिन उनमें से रुदौली का अपना विशेष महत्व है क्योंकि यह सीट एक मुस्लिम एवं यादव बाहुल्य है. पिछले दो विधानसभा चुनावों (2012 एवं 2017) में यहाँ पर भाजपा को जीत मिली और रामचंद्र यादव विधायक बने. उसके पहले दो विधानसभा चुनावों  ( 2002 एवं 2007) में सपा के अब्बास अली जैदी (रुश्दी मियां) ने जीत दर्ज की थी. इस बार भी भाजपा ने रामचन्द्र यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है. गौरवतलब है कि रामचंद्र यादव पहले सपा के जिलाध्यक्ष थे एवं मिल्कीपुर से भी दो बार विधायक रह चुके हैं. रामचंद्र यादव को सपा के दिग्गज नेता मित्रसेन यादव का शिष्य माना जाता है. रामचंद्र यादव ने भाजपा में आने के बाद भी कभी भी मित्रसेन यादव का विरोध नहीं किया. मित्रसेन के बाद बीकापुर में भी सपा कमजोर हुई और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी आनंदसेन लगातार विफल हो रहे हैं. बीकापुर से 2017 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद आनंदसेन 2019 में सपा बसपा गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में लोकसभा का चुनाव भी लड़े लेकिन उसमें भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा. चुनाव के बाद आनंदसेन की निष्क्रियता ही उनकी हार का मुख्य कारण बन रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीकापुर में एक बार फिर से अपनी हार देखते हुए आनंदसेन बीकापुर सीट से दुम दबाकर निकलने की फिराक में हैं और रुदौली विधानसभा सीट पर अपने लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं. अब सवाल यह उठता है कि जो व्यक्ति अपने क्षेत्र में अपनी पार्टी को जीत नही दिला सकता वो दूसरे के क्षेत्र में सपा को कैसे जीत दिलाएगा. यदि सपा आनंदसेन को रुदौली से अपना प्रत्याशी बनाती है तो भाजपा के रामचंद्र यादव की जीत की राह बिलकुल ही आसान हो जायेगी. जबकि रुदौली से जो सर्वे निकलकर आ रहे थे उसमें सपा के स्थानीय दावेदार की वजह से इस बार भाजपा की राह बहुत मुश्किल लग रही थी. जिस यादव वोट बैंक को ध्यान में रखकर सपा के कुछ लोग आनंदसेन यादव को रुदौली लाना चाह रहे हैं उन्हें एक बार ये भी सोचना चाहिए कि रुदौली में सपा के अन्य जाति और धर्म के भी वोट बैंक है जो बाहरी प्रत्याशी की वजह से विद्रोह करके दूसरे राजनीतिक दलों में चली जायेगी जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा. राजनीतिक गलियारों में तो यह भी चर्चाएँ हो रही हैं कि आनंदसेन यादव और रामचंद्र यादव एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं और रामचंद्र यादव को जिताने के लिए ही आनंदसेन रुदौली से चुनाव लड़ना चाहते हैं. जिस यादव वोट बैंक काटने की बात आनंदसेन कर 

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