इजरायल और भारत की गहरी दोस्ती पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने निकाली भड़ास

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इजरायल और भारत को करीबी दोस्त बताया है और कहा कि इजरायल का दौरा करने के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2019 में कश्मीर को लेकर इतनी बड़ी नीति लागू की थी. इमरान खान ने 11 अक्टूबर को मिडिल ईस्ट आई को दिए इंटरव्यू में अफगानिस्तान, भारत, इजरायल और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर कई सवालों के जवाब दिए.

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से इंटरव्यू में सवाल किया गया कि फिलीस्तीन और कश्मीर की स्थिति मिलती-जुलती है, ऐसे में भारत और इजरायल की दोस्ती कितनी खतरनाक है? इस सवाल पर इमरान खान ने कहा कि इसमें दो राय नहीं कि भारत-इजरायल काफी करीब हैं. इजरायल की यात्रा के बाद ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर को लेकर इतनी बड़ी और कठोर नीति लागू की थी.

‘इजरायल की तरह भारत कुछ भी करके बच सकता है’
इमरान खान ने कहा, क्या इसका ये मतलब निकाल सकते हैं कि उन्हें इसका इशारा इजरायल से मिला था क्योंकि इजरायल भी कुछ ऐसा ही कर रहा है. उन्होंने एक मजबूत तंत्र बनाया हुआ है और वे किसी भी तरह के विरोध को कुचल रहे हैं. वे अपने लोगों को भेजकर किसी को भी जान से मार दे रहे हैं और उन्हें पूरी इम्युनिटी मिली हुई है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुछ भी बयान दे लेकिन उन्हें पता है कि अमेरिका अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर उन्हें बचा लेगा.

उन्होंने कहा, चीन के खिलाफ अमेरिका के गठबंधन का हिस्सा होने की वजह से भारत को भी अब लगने लगा है कि उनके पास इजरायल जैसी ही इम्युनिटी (सुरक्षा कवच) है और वे भी कुछ भी कर सकते हैं. कश्मीर में इस समय मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. इतने बुरे हालात कहीं भी नहीं हैं.  इजरायल भी ऐसे ही जुल्म कर रहा है लेकिन कहीं भी चीजें इतनी खराब नहीं है जितनी कश्मीर में हैं.

इमरान ने इजरायल को मान्यता देने के लिए गल्फ देशों के किसी भी तरह के दबाव से भी इनकार किया और कहा कि पाकिस्तान एक लोकतांत्रिक देश है जो लोगों को साथ लिए बिना एकतरफा फैसला नहीं ले सकता है.

‘अमेरिका का साथ देने के चलते पाकिस्तान ने चुकाई बड़ी कीमत’ – इमरान खान से पूछा गया कि क्या आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में वे अमेरिका के बेस को पाकिस्तान में अनुमति देंगे? इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अब अमेरिका को पाकिस्तान में बेस की जरूरत नहीं है क्योंकि हम एक बार फिर किसी तरह के संघर्ष का हिस्सा नहीं होना चाहते हैं. अमेरिका के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने के बाद से ही पाकिस्तान ने बड़ी कीमत चुकाई है. पाकिस्तान के अलावा किसी देश को इस लड़ाई में इतना नुकसान नहीं झेलना पड़ा है. ये दुख की बात है कि पाकिस्तान को बलि का बकरा बनाया जाता रहा है.

इमरान से पूछा गया कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर क्या उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से बात हुई है? इस पर इमरान ने कहा कि उनकी अब तक जो बाइडेन से बात नहीं हो पाई है. इमरान ने कहा कि मैंने साल 2008 में अमेरिकी अधिकारियों को कहा था कि अफगानिस्तान में अमेरिकी मिलिट्री से कोई हल निकलने वाला नहीं है और अमेरिका अपने लिए इराक से भी ज्यादा मुश्किल स्थिति खड़ी करने जा रहा है. लेकिन दुर्भाग्य से उनका बस यही जवाब होता था कि हमें बस कुछ वक्त और सोल्जर्स की जरूरत है.

‘तालिबान को मान्यता दे दुनिया’ – उन्होंने एक बार फिर इस बात पर भी जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को तालिबान को मान्यता देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को एक स्थायी सरकार की जरूरत है. तालिबान ने एक समावेशी सरकार बनाने की बात भी कही है. इंटरनेशनल ताकतें अगर तालिबान का समर्थन नहीं करती हैं और उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाती हैं तो मुझे डर है कि तालिबान में मौजूद कुछ कट्टरपंथी ऐसे हैं जो इस संगठन को एक बार फिर 20 साल पहले के भयानक दौर में ले जा सकते हैं. एक स्थायी सरकार ही आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन के साथ लड़ सकती है और आईएसआईएस के साथ लड़ने के लिए तालिबान ही एक विकल्प बचता है.

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