भारत ने आज कहा कि अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया को लेकर सभी पक्षों में गंभीरता होनी जरूरी है और देश की स्वतंत्रता एवं संप्रभुता तभी बच सकती है जब इसे दुर्भावना पूर्ण प्रभावों से मुक्त रखा जाये। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन से द्विपक्षीय बैठक के बाद यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बातचीत मुख्यत: क्षेत्रीय मुद्दों खासकर अफगानिस्तान पर केन्द्रित रही जहां से अमेरिका की सेना हट रही है। डॉ. जयशंकर ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के बारे में यह बहुत आवश्यक है कि शांति प्रक्रिया को सभी पक्ष गंभीरता से लें। विश्व समुदाय एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, संप्रभु एवं स्थिर अफगानिस्तान देखना चाहते हैं जो खुद और अपने पड़ोसियों के साथ शांति से रहे। लेकिन स्वतंत्रता एवं संप्रभुता तभी सुनिश्चित की जा सकती है जब यह प्रक्रिया दुर्भावना पूर्ण प्रभावों से मुक्त रहे।’’ विदेश मंत्री का इशारा पाकिस्तान के बारे में था जिसकी अफगान सीमा पर आतंकवादियों का जमावड़ा है। विदेश मंत्री ने कहा कि इकतरफा ढंग से किसी की इच्छा को थोपना स्वाभाविक रूप से लोकतांत्रिक नहीं होगा और उससे स्थिरता भी नहीं आयेगी। ना ही इसे किसी प्रकार की वैधानिकता दी जा सकती है। बीते दो दशकों के दौरान अफगान समाज को मिली उपलब्धियों खासकर महिला, अल्पसंख्यकों एवं सभी सामाजिक स्वतंत्रता स्वयं प्रमाण हैं। हमें सामूहिक रूप से इसकी रक्षा करनी होगी। उन्होंने आगाह किया कि अफगानिस्तान हर हाल में आतंकवाद का घर ना बने और ना ही शरणार्थियों का स्रोत। विदेश मंत्री ने हिंद प्रशांत क्षेत्र के बारे में बातचीत की जानकारी देते हुए कहा कि भारत की दृष्टि से हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता प्रगति एवं समृद्धि की अलग प्रकार की चुनौतियां हैं। क्वाड के फ्रेमवर्क में हम समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद निरोधक उपायों, कनेक्टिविटी और अवसंरचना, साइबर एवं डिजीटल चुनौतियां, कोविड से निपटने के उपाय, जलवायु कार्रवाई, शिक्षा एवं टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला के लिए काम कर रहे हैं। आज की बैठक में इन्हीं मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के अवसरों तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों, नियमों एवं व्यवहार के पालन के उपायों के बारे में चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडा के बारे में भी चर्चा हुई विशेष रूप से बहुपक्षवाद में सुधार को लेकर। संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क में तथा द्विपक्षीय आधार पर आतंकवाद से मुकाबले के बारे में सहयोग बढ़ाने के बारे में भी बात हुई। इस बात से हम सहमत हैं कि विश्व सीमा पार आतंकवाद को कभी स्वीकार नहीं करेगा। बैठक में जलवायु परिवर्तन के एजेंडा 2030, स्वच्छ ऊर्जा के लिए वित्तपोषण के बारे में भी बात हुई।

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केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने बुधवार को मिजोरम और असम के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की जिसमें यह सहमति बनी कि दोनों राज्य सीमा विवाद का सौहार्दपूर्ण ढंग से समाधान करेंगे। गृह मंत्रालय के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि करीब दो घंटे चली बैठक में दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों ने हिस्सा लिया।

बैठक में दोनों पक्षों के बीच सीमा विवाद का समाधान सौहार्दपूर्ण ढंग से निकालने पर सहमति बनी। बैठक में यह भी सहमति बनी कि राष्ट्रीय राजमार्ग 306 से लगते विवादित क्षेत्र में निष्पक्षता के लिए केंद्रीय पुलिस बलों की तैनाती की जाएगी। पुलिस बल की तैनाती केंद्रीय पुलिस बल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि मिजोरम और असम के पुलिस बलों तथा नागरिकों के बीच गत 26 जुलाई को तीखी झड़प हुई जिसमें असम के छह पुलिसकर्मी मारे गए। दोनों ओर से इस झड़प में अनेक लोग घायल भी हुए थे। इस झड़प के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की थी और उनसे शांतिपूर्ण ढंग से मुद्दे का समाधान करने को कहा था। दोनों राज्यों के बीच 160 किलोमीटर लंबी सीमा का विवाद काफी पुराना है।

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