राफेल सौदे में सरकार की चुप्पी भ्रष्टाचार दबाने की कोशिश : एंटनी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व रक्षामंत्री ए. के. एंटनी ने कहा है कि राफेल सौदे में भ्रष्टाचार साफ दिख रहा है और इसमें मोदी सरकार की संदेहास्पद चुप्पी से लगता है कि विमान खरीद में हुए भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश की जा रही है। एंटनी ने आज यहां जारी एक बयान में कहा कि मोदी सरकार द्वारा दोषियों की जांच करने और उन्हें दंडित करने से इनकार करना आश्चर्यजनक है और इससे साफ होता है कि सरकार घोटाले को दबाने का प्रयास कर रही है।

इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी संदेहास्पद है और भ्रष्टाचार को दबाने की उसकी मंशा की ओर संकेत करती है। उन्होंने कहा कि इस सौदे का घटनाक्रम ही सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अप्रैल 2015 को पेरिस गए और बिना किसी निविदा प्रक्रिया को अपनाए और ‘रक्षा खरीद प्रक्रिया’ का पूर्ण उल्लंघन करते हुए 36 राफेल विमानों की खरीद की घोषणा कर दी।

एंटनी ने कहा कि राफेल की खरीद देश का सबसे बड़ा रक्षा सौदा था और इसको लेकर मोदी के एकतरफा आदेश से हर रक्षा विशेषज्ञ आश्चर्यचकित रह गया था। इसमें आश्चर्य यह भी था कि 126 राफेल विमानों की खरीद के साथ ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड-एचएएल में 108 विमान बनाए जाने थे तथा भारत को विमानों की ‘प्रौद्योगिकी हस्तांतरण’ की जानी थी। उन्होंने कहा कि अब तक विमानों की संख्या 126 से कम कर 36 करने और भारत को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से वंचित रखने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। भाजपा सरकार ने 36 विमानों की कीमत बढ़ाने या एचएएल को ऑफसेट अनुबंध से वंचित करने का आधार या कारण भी नहीं बताया है।

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