Moderna और Pfizer जैसे टीकों को देश में आपात इस्तेमाल की मंजूरी, नहीं होगा ट्रायल

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FILE PHOTO: Vials with Pfizer-BioNTech and Moderna coronavirus disease (COVID-19) vaccine labels are seen in this illustration picture taken March 19, 2021. REUTERS/Dado Ruvic
विदेशी वैक्सीन फाइजर और मॉडर्ना का देश में आने का रास्ता साफ हो गया है। कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) ने फाइजर और मॉडर्ना जैसी विदेशी वैक्सीन के अलग से ट्रायल कराने की शर्तों को हटा दिया है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया के अनुसार अब मॉडर्ना और फाइजर जैसी विदेशी कोरोना वैक्सीन का ट्रायल भारत में नहीं होगा।कहा गया है कि विदेशी वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन अथवा अमेरिकी एफडीए से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है, फिर अब भारत में ट्रायल से नहीं गुजरना होगा। इसकी जरूरत नहीं है। हालांकि रूसी वैक्सीन स्पुतनिक को ट्रायल के बाद अप्रूवल दिया गया था। हालांकि अब भारत सरकार और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने तर्क दिया है कि जिन वैक्सीन को दुनिया के बाकी देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से  इमरजेंसी उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है, उनका दोबारा से ट्रायल करने की कोई जरुरत नहीं है। इसके साथ ही यह सवाल खड़ा भी खड़ा हो गया कि अब क्या चीन की वैक्सीन के लिए भी भारत आने के रास्ते खुल गए हैं।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार हेल्थ मिनिस्टी की ओर से संकेत मिले हैं कि फाइजर और मॉडर्ना को ब्रिजिंग ट्रायल करने की जरूरत नहीं हैं। दुनिया के दूसरे देश ऐसा कर रहे हैं तो इसके लिए भारत भी तैयार है। अगर इन दोनों में से कोई भी भारत में इमरजेंसी यूज के लिए आवेदन करता है तो भारत सरकार को बिना ट्रायल के लिए मंजूरी देने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। जानकारी के अनुसार डिमांड ज्यादा होने की वजह से इन दोनों वैक्सीन को भारत आने में थोड़ा वक्त लग सकता है।
अमरीकी कंपनियों फाइजऱ और मडर्ना की ओर से क्षतिपूर्ति और लोकल ट्रायल में छूट की मांग की थी। वैसे सरकार ने वैक्सीन से संभावित दुष्प्रभाव के मुआवजे की क्षतिपूर्ति पर कोई फैसला नहीं लिया है। सरकार  लोकल ट्रायल न करने की बात पर राजी हो गई है। डीसीजीआई एक लेटर में साफ लिखा है कि विदेशी कंपनियों की कोरोना वैक्सीन के लांच होने के बाद भारत में ट्रायल की क्लॉज को हटा दिया गया है। अगर किसी वैक्सीन को उसके और किसी दूसरे देश और डब्ल्यूएचओ की ओर से मंजूरी मिल चुकी है, उसका भारत में इस्तेमाल करने से पहले ट्रायल की जरुरत नहीं होगी।

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