IT मंत्रालय ने कहा – जांच को प्रभावित करना चाहता है Twitter

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 आम टूलकिट तो औजारों का सेट होती है लेकिन इंटरनेट के दौर में जो टूलकिट चर्चा में है उसे किसी मुद्दे, आंदोलन या अभियान के लिए बड़े वर्ग को प्रभावित करने के उपायों के संकलन के तौर पर समझ सकते हैं। कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ग्रेटा थनबर्ग की टूलकिट भी काफी चर्चा में रही थी।टूलकिट उन तमाम जानकारियों का संग्रह होती है जिससे किसी मुद्दे को समझने और उसके प्रचार-प्रसार में मदद मिलती है। दरअसल ये किसी थ्योरी को प्रैक्टिकल में बदलने वाला दस्तावेज है, जो आम तौर पर किसी खास मुद्दे और खास दर्शक/समर्थक वर्ग के लिए तैयार की जाती है। टूलकिट जितनी विस्तृत और परिपूर्ण होगी, लोगों के लिए उतना ही उपयोगी साबित होगी। इनका प्रयोग राजनीतिक अपना एजेंडा चलाने या चुनाव अभियान के लिए भी करने लगे हैं।
सरकार ने कड़े शब्दों में कहा कि ट्विटर सिर्फ एक माध्यम है और वह इस तरह जांच के बीच कोई फैसला नहीं दे सकता है। ट्विटर ने अपनी सीमा लांघी है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के कांग्रेस टूलकिट ट्वीट को मेनीपुलेटेड मीडिया करार दिए जाने की ट्विटर की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए केंद्रीय सूचना तकनीक और इलेक्ट्रानिक्स मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में भारत में जांच चल रही है। लगता है कि ट्विटर ने जांच को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर और पक्षपात के साथ ऐसा व्यवहार किया है। गौरतलब है कि दो दिन पहले पात्रा ने ट्वीट कर कहा था कि कांग्रेस ने सरकार को बदनाम करने के लिए एक टूलकिट बनाया है। इसके खिलाफ कांग्रेस ने पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई थी। जवाब में पात्रा ने कांग्रेस की सौम्या वर्मा का नाम लेते हुए दावा किया कि उन्होंने ही इसे लिखा है।
सुबूत के रूप में उन्होंने एक पेज भी अपलोड किया जिसे गुरुवार की रात ट्विटर ने मेनीपुलेटेड करार दिया। इसके बाद से जहां कांग्रेस हमलावर है, वहीं भाजपा का दावा है कि सरकार को बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने पूरा दस्तावेज तैयार किया है।
इस बीच, सूचना तकनीक मंत्रालय ने ट्विटर को पत्र लिखा और कहा कि वह मेनीपुलेटेड टैग हटाए। इस मामले में एक पार्टी कानून की शरण में जा चुकी है। वहां टूलकिट की सत्यता की जांच की मांग की गई है। जांच चल रही है और वहीं से सत्यता सामने आएगी। ट्विटर का व्यवहार पक्षपाती है, लिहाजा टैग हटाए। बता दें कि पिछले दिनों में ट्विटर हमेशा विवादों में रहा है। कई मौके पर कांग्रेस की ओर से ट्विटर पर पक्षपात का आरोप लगाया गया।
वहीं सरकार ने भी कई अवसरों पर ट्विटर की मंशा पर सवाल खड़े किए। कृषि कानून विरोधी आंदोलन के दौरान भी ट्विटर की निष्पक्षता पर सवाल खडे़ हुए थे। सरकार की ओर से बार-बार आग्रह किए जाने के बावजूद ऐसे ट्वीट नहीं हटाए गए जिनसे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी। तब सरकार की ओर से यह भी इशारा किया गया था कि ट्विटर के ग्लोबल सीइओ जैक डोरसी ने विदेशी सेलिब्रिटी के किसान आंदोलन समर्थक ट्वीट को लाइक किया था।

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