GST मुआवजे को लेकर नहीं बनी बात, इन राज्यों ने ठुकराई केंद्र की सलाह

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सोमवार को चली GST काउंसिल की मैराथन बैठक में राज्यों के मुआवजे को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन पाई. केंद्र सरकार की ओर से दिए गए दो प्रस्तावों पर सिर्फ 12 राज्यों ने ही अमल करने पर अपनी रजामंदी जताई है. 9 राज्य केंद्र की सलाह को मानने के लिए अब भी तैयार नहीं हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन 9 राज्यों की मांगों पर विचार करने के लिए और वक्त मांगा है.

देर रात तक चली GST काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि बैठक में सेस, सेस कलेक्शन और सेस कलेक्शन की समयसीमा बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि राज्यों के राजस्व को लेकर हुई बहस को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी है.

वित्त मंत्री ने कहा कि ‘मुआवजों का भुगतान करने के लिए सेस का कलेक्शन पर्याप्त नहीं हुई है, ये बात सभी को पता है और साफ दिख रही है, क्योंकि ऐसी चीज पहले कभी नहीं हुई. जो भी कमी है उसे कर्ज लेकर पूरा किया जाएगा.’

निर्मला सीतारमण ने बताया कि GST काउंसिल के सदस्यों का एक सवाल था कि क्या GST काउंसिल केंद्र उधार ले सकता है या फिर राज्यों को ही लेना होगा. वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब देश को निवेश के लिए और पैसों की जरूरत है या बिजनेस के लिए कर्ज चाहिए, भारत बढ़ी हुई उधारी लागत को झेल नहीं सकता. अगर राज्य कर्ज लेते हैं तो ये असर उतना ज्यादा नहीं होगा. GST काउंसिल में इस बात पर सहमति बनी कि सेस को अगले 5 साल के लिए आगे बढ़ाया जाए.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि ‘राज्यों का कर्ज लेना कोई परेशानी की बात नहीं है, हम सुविधा देंगे ताकि कुछ राज्यों को ऊंची ब्याज दरों से छुटकारा मिल सके और बाकियों को सही दरों पर लोन मिल सके.’ उन्‍होंने सभी राज्‍यों से इस मामले का समाधान निकालने के लिए एकमत होने की अपील की.
केंद्र ने राज्‍यों को दिए थे दो विकल्प

अगस्त 2020 में हुई GST काउंसिल की बैठक में केंद्र ने राज्यों को उनके मुआवजे की भरपाई के लिए दो विकल्प दिए थे. पहला, राज्य RBI से स्पेशल विंडो के तहत कर्ज ले सकते हैं. इसमें कम ब्याज दर पर राज्यों को 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज मिल सकता है. इस रकम को 2022 तक सेस कलेक्शन से जमा किया जा सकता है.

हालांकि, 10 गैर-भाजपा शासित राज्‍यों ने इसे मानने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि केंद्र लोन लेकर उन्हें जीएसटी मुआवजे की भरपाई करे. दूसरा रास्ता ये है कि स्पेशल विंडो के तहत पूरा 2.35 लाख करोड़ रुपये कर्ज लिया जा सकता है.

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