स्वास्थ्य मंत्रालय ने दूर की कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर पैदा हुई टेंशन, कहा-डरे नहीं वैक्सीन असरदार

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कोरोना के नए स्ट्रेन के देश में प्रवेश ने जहां देशवासियों की टेंशन बढ़ा दी वहीं सरकार ने इस टेंशन को कुछ कम कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत में कोरोना वायरस के नए वेरियंट के 6 मामले सामने आए हैं जो चिंता का विषय हैं। हालांकि इस बात की आशंका हमें पहले ही थी और हम इसके लिए तैयार हैं। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो के विजय राघवन ने कहा- ‘कोरोना वैक्सीन यूके और दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले वेरियंट्स के खिलाफ भी काम करेंगी। इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि वर्तमान वैक्सीन इन कोरोना वेरियंट्स से बचाने में नाकाम रहेंगी।’ स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि डरे नहीं कोरोना वैक्सीन नए स्ट्रेन पर भी असरदार होगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद  ICMR के डीजी प्रोफेसर बलराम भार्गव ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हम वायरस पर बहुत अधिक इम्यून प्रेशर न डालें, हमें ऐसी थेरेपी का प्रयोग करना होगा जो लाभ देने वाली हैं। यदि फायदा नहीं होता है तो हमें उन उपचारों का उपयोग नहीं करना चाहिए अन्यथा यह वायरस पर प्रेशर डालेगा और यह अधिक म्यूटेट करेगा। नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि नए स्ट्रेन ने कई देशों की यात्रा की है, ऐसे में हमें सावधान रहने की जरूरत है। वायरस के प्रसार को दबाना आसान है, क्योंकि ट्रांसमिशन की चेन छोटी है। उन्होंने कहा कि विदेश से आने वाले 20 में से 1 यात्री का यूके वैरियंट का टेस्ट किया जाएगा।

उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक समिति का गठन किया है, जो यह तय करेगी कि किन बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को पहले कोरोना वैक्सीन दी जायेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की मंगलवार को हुई नियमित साप्ताहिक प्रेस वार्ता में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई बड़ी और गंभीर बीमारी है, जिससे उनके कोरोना संक्रमित होने पर मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना वैक्सीन का डोज देने में इस तथ्य को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आयु के आधार पर भी कोरोना वैक्सीन पहले देने की प्राथमिकता तय की गयी है। इसमें पहले से किसी अन्य गंभीर बीमारी ग्रसित व्यक्ति और स्वस्थ व्यक्ति भी शामिल हैं। डॉ पॉल ने कहा कि 12 से अधिक विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया है, जो कुछ दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। ये समिति तय करेगी कि किस आधार पर यह सुनिश्चित किया जायेगा कि कोई खास व्यक्ति कोरोना वैक्सीन देने की प्राथमिकता की श्रेणी में शामिल होगा या नहीं। उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति हल्की बीमारी से ग्रसित है, जैसे हाइपरटेंशन तो उसे प्राथमिकता दी जायेगी या नहीं , इसका निर्धारण कैसे किया जाये, यह तय समिति करेगी। इस समिति में अलग -अलग बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी, हृदय और फेफड़े की बीमारी के विशेषज्ञ शामिल हैं।

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