मध्यप्रदेश के गृह मंत्री मिश्रा ने बिना नाम लिए सोनिया गांधी को बताया ‘कैकेई’

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 मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लिए बिना उनपर निशाना साधा है. नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “मुझे व्हाट्सएप आया कि कैकेई के बाद ऐसी कौन सी मां है जो षड्यंत्र पूर्वक अपने बेटे को गद्दी दिलाना चाहती है. वो बोला ताश की गड्डी में कितने पत्ते होते हैं, जवाब मिला 52, इस पार्टी के भी 52 सांसद हैं. हैरानी की बात यह है कि एक जोकर (पार्टी में) है.”

मिश्रा ने आगे कहा, “मुझे एक व्हाट्सएप फॉरवर्ड मिला, जिसमें कहा गया था कि जापान में हर दिन स्कूल जाने वाले बच्चे को लेने के लिए ट्रेन रुकती है. वे नहीं जानते कि भारत में एक पार्टी एक बच्चे को प्रधानमंत्री बनाने के लिए काम कर रही है.”

#WATCH मुझे व्हाट्सएप आया कि कैकई के बाद कौन सी माँ है जो षड्यंत्र पूर्वक अपने बेटे को गद्दी दिलवाना चाहती है। वो बोला ताश की गड्डी में कितने पत्ते होते हैं, जवाब मिला 52, इस पार्टी के भी 52 सांसद हैं: मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, इंदौर में संभागीय किसान सम्मेलन में pic.twitter.com/QvAjeLt6we

— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 16, 2020

हिंदू पौराणिक महाकाव्य रामायण में अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियों में से एक थीं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दशरथ ने अपने ज्येष्ठ पुत्र राम को राजा चुना था, जिनकी माता कौशल्या थी. लेकिन कैकेयी ने मांग की था कि राम को 14 साल के लिए वनवास पर भेज दिया जाए और उनके बेटे भरत को राजा बनाया जाना चाहिए.

मिश्रा ने अपने भाषण के दौरान आगे कांग्रेस पर कृषि कानूनों को लेकर गलतफहमी पैदा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “दिल्ली में विरोध क्यों हो रहा है? अगर पुराने कृषि नियम सही होते, तो इतने सालों तक भी किसानों पर कर्ज नहीं होता. नया कृषि कानून किसानों के उत्थान के लिए है.’

उन्होंने कहा, “ऐसी चर्चा थी कि कांग्रेस के लोग भूख हड़ताल पर जाएंगे. ये लोग गलतफहमी पैदा कर रहे हैं. यह पार्टी भारत के लोगों के खिलाफ है. वे हर आंदोलन के दौरान गलतफहमी पैदा करते हैं.”

बता दें, केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के किसान 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की अलसग-अलग बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं.

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