कुम्भ मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर : आनंदी बेन

0
631

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कुम्भ मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर है।  पटेल ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये गोविन्द वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान तथा प्रयागराज मेला प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में स्थापित ‘कुम्भ अध्ययन केन्द्र’ का उद्घाटन करने के बाद कहा कि कुम्भ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के लिए अभी तक देश में कोई शोध केन्द्र नहीं था। यह केन्द्र कुम्भ मेले से सम्बद्ध शोध, अभिलेखीकरण एवं ज्ञान.विमर्श पर केन्द्रित होगा। संस्थान की उच्च स्तरीय फैकल्टी एवं उनका शोध अनुभव जनसामान्य को कुम्भ की परम्पराओं और विरासत को समझने की एक नई दृष्टि देगा।

राज्यपाल ने कहा कि ‘कुम्भ अध्ययन केन्द्र’ केन्द्र एवं राज्य सरकार के नीति नियोजकों के लिए एक डाटाबेस का कार्य करेगा, जो कुम्भ मेले में आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए बेहतर संयोजन होगा। यह केन्द्र प्रयागराज के कुम्भ क्षेत्र और इसके आस-पास के क्षेत्र में स्थित छोटे-छोटे तीर्थो के डाक्यूमेंटेशन का कार्य भी करेगा। इससे देश और विदेश से आने वाले पर्यटक प्रयागराज के सांस्कृतिक स्वरूप को और बेहतर तरीके से जान सकेंगे। उन्होने अपील की ‘‘ आप अपने को ज्ञान के केन्द्र के रूप में विकसित करें, ताकि कुम्भ अध्ययन केन्द्र सामाजिक एवं अध्यामिकता का केन्द्र बन सके। हम सब मिलकर भारत को शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में पूरी दुनिया में शीर्ष पर ले जा सकें। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए सामाजिक शोधों की बहुत जरूरत है। स्थानीय ज्ञान एवं उत्पादों पर शोध एवं भारतीय समाज में संचित जन-ज्ञानकोषों को हमें अपने शोधों से तलाशना होगा।’’

पटेल ने कहा कि प्रयागराज प्राचीन काल से ही देश का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र रहा है। यहां गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम होने का साथ.साथ आस्था और तपस्या का अनूठा संगम है। कुम्भ मेला पूरी दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है। इसका मूल स्रोत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से जुड़ा है, जो पूरे विश्व के लिये प्रेरणादायी है। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से कुम्भ मेले को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि कुम्भ मेले को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। इस अवसर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बद्री नारायण एवं संस्थान के सभी संकायों के सदस्यगण आनलाइन जुड़े हुए थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here