किसानों की हितैषी त्रिवेंद्र सरकार, दुगुनी आय का सपना हो रहा है साकार

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प्राचीनकाल से कृषि लोगों की आजीविका का मुख्य साधन रही है और आज भी जनसँख्या का अधिकांश भाग जीवन के जीवन के निर्वाह के लिए कृषि पर निर्भर है. इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दुगुना करने का लक्ष्य रखा है. उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार भी केंद्र की मोदी सरकार के साथ कदमताल करते हुए किसानों की आय को दुगुना करने हेतु हरसंभव प्रयास कर रही है और किसानों के सपनों को साकार कर रही है.

त्रिवेंद्र सरकार ने पिछले 4 वर्षों के भीतर ही उत्तराखंड में कृषि को घाटे के सौदे से मुनाफे में बदल दिया है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के प्रयासों से एक ओर राज्य में जहाँ  खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ा है तो वहीं दूसरी ओर राज्य के किसानों की आय में भी इजाफा हुआ है. उत्तराखंड में कृषि के प्रगति को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और देश का प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार भी मिला.

कृषि में सुधार एवं निवेश के लिए त्रिवेंद्र सरकार किसानों को 3 लाख तक का ब्याजमुक्त कर्ज दे रही है ; जिसके माध्यम से अब तक प्रदेश के हजारों किसान लाभान्वित हो चुके है. प्रदेश के 6.84 लाख किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का फायदा भी मिल रहा है.

जैविक उत्पादों की बढ़ती महत्ता और मूल्य को देखते हुए त्रिवेंद्र सरकार उत्तराखंड में जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है . जैविक खेती में किसानों की लागत भी शून्य के बराबर आ रही है और लाभ अधिक हो रहा है. राज्य में जैविक कृषि प्रशिक्षण हेतु अल्मोड़ा में राजकीय जैविक प्रशिक्षण केंद्र  की स्थापना भी की गई है.

किसानों की आय को और अधिक बढ़ाने के लिए त्रिवेंद्र सरकार कृषि के साथ-साथ पशुपालन और बागवानी को भी प्रोत्साहन दे रही है. मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी योजना के तहत त्रिवेंद्र सरकार बागवानी हेतु 7.5 से 13 लाख तक की सब्सिडी दे रही है.

प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती और बागवानी को जंगली सूअर और बंदरों से बचाने के लिए तार-बाड़ योजना की शुरुआत की गई है.

त्रिवेंद्र सरकार द्वारा किए गए इन्हीं सब प्रयासों का नतीजा है कि उत्तराखंड के किसानों की आय में बढ़ोत्तरी हुई है और वे खुशहाल हो रहे हैं.

 

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