उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति संग प्रधानमंत्री मोदी की बैठक, दोनों देशों के बीच इन समझौतों पर हुए हस्ताक्षर

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भारत और उज़्बेकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ दृढ़ता से मुकाबला करने तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवान्वेषण तथा सरकारी संस्थानों, शाेध एवं तकनीकी संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के इरादे का आज इजहार किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ीयोयेव के बीच आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई द्विपक्षीय शिखर बैठक में यह सहमति व्यक्त की गई। इस मौके पर दोनों देशों के बीच सौर ऊर्जा, डिजीटल प्रौद्योगिकी, प्रतिरक्षा एवं सुरक्षा, डॉलर ऋण, साइबर सुरक्षा, सीमा शुल्क, जनसंचार के क्षेत्रों में नौ समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।

मोदी ने बैठक में अपने आरंभिक उद्बोधन में कहा कि उग्रवाद, कट्टरवाद तथा अलगाववाद के बारे में हमारी एक जैसी चिंताएं हैं। हम दोनों ही आतंकवाद के ख़िलाफ़ दृढ़ता से एक साथ खड़े हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी हमारा एक जैसा नजरिया है। हम सहमत हैं कि अफगानिस्तान में शांति की बहाली के लिए एक ऐसी प्रक्रिया आवश्यक है जो स्वयं अफ़ग़ानिस्तान की अगुआई, स्वामित्व और नियंत्रण में हो। पिछले दो दशकों की उपलब्धियों को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।

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उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हमारी आर्थिक साझेदारी भी मजबूत हुई है। हम उज्बेकिस्तान के साथ अपनी विकास साझीदारी को भी और घनिष्ठ बनाना चाहते हैं। खुशी की बात है कि भारतीय ऋण के अंतर्गत कई परियोजनाओं पर विचार किया जा रहा है। उज्बेकिस्तान की विकास प्राथमिकताओं के अनुसार हम भारत की विशेषज्ञता एवं अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि अवसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत में काफी काबिलियत है, जो उज्बेकिस्तान के काम आ सकती है। हमारे बीच कृषि संबंधित संयुक्त कार्य समूह की स्थापना एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम हैं l इससे हम अपने कृषि व्यापार बढ़ाने के अवसर खोज सकते हैं जिससे दोनों देशों के किसानों को मदद मिलेंगी।

उन्होंने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान दो समृद्ध सभ्यताएं हैं। हमारे प्राचीन समय से ही निरंतर आपसी संपर्क रहे हैं। हमारे क्षेत्र की चुनौतियों और अवसरों के बारे में हमारी समझ और कार्ययोजना में बहुत समानता है। और इसलिए हमारे संबंध हमेशा से बहुत मजबूत रहे हैं। 2018 और 2019 में आपकी भारत यात्राओं के दौरान हमें कई मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर मिला, जिससे हमारे संबंधों में एक नई गति देखने को मिली।

 

मोदी ने कहा कि हमारी सुरक्षा साझेदारी द्विपक्षीय संबंधों का एक मजबूत स्तम्भ बनती जा रही है। पिछले वर्ष हमारे सशस्त्र बलों का सबसे पहला संयुक्त सैन्य अभ्यास हुआ। अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में भी हमारे सयुंक्त प्रयास बढ़ रहे हैं। यह भी संतोष का विषय है कि कोविड-19 महामारी के इस कठिन समय में दोनों देशों ने एक-दूसरे को भरपूर सहयोग दिया है। चाहे दवाइयों की आपूर्ति के लिए हो या एक-दूसरे के नागरिकों को सुरक्षित घर लौटाने के लिए। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेशों के बीच भी सहयोग बढ़ रहा है। गुजरात और अन्दिजों की सफल भागीदारी के मॉडल पर अब हरियाणा और फरगाना के बीच सहयोग की रूपरेखा बन रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मिर्जीयोयेव के नेतृत्व में उज्बेकिस्तान में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहे हैं, और भारत में भी हम सुधारों के मार्ग पर अडिग हैं। इससे कोविड पश्चात काल में हमारे बीच आपसी सहयोग की संभावनाएं और बढ़ेंगी। ऐसा विश्वास है कि आज की हमारी इस चर्चा से इन प्रयासों को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।

बाद में जारी एक संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि दोनों नेताओं ने भारत एवं उज़्बेेकिस्तान के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवान्वेषण तथा सरकारी संस्थानों, शाेध एवं तकनीकी संस्थानों के बीच सीधा सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय निवेश संधि को जल्द से जल्द करने के लिए काम करने पर भी सहमति जतायी जो निवेश को बढ़ावा देगी और कारोबारी एवं आर्थिक सहयोग में सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। बैठक में भारतीय पक्ष ने उज़्बेकिस्तान में सड़क निर्माण, सीवरेज निस्तारण और सूचना प्रौद्योगिकी की चार परियोजनाओं के लिए 44.8 अरब डॉलर का ऋण को स्वीकृति की पुष्टि की।

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