अभिमन्यु नहीं अर्जुन की तरह लड़ रहे हैं त्रिवेंद्र

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उत्तराखंड का यह दुर्भाग्य रहा है कि जबसे इस राज्य का गठन हुआ है तभी से यहाँ के शासन-प्रशासन में माफियाओं एवं दलालों का काफी हस्तक्षेप रहा है. वे अपने हितों के लिए यहाँ के शासन-प्रशासन को अपनी उँगलियों पर नचाते रहे हैं और समय-समय पर हित पूरे न होने पर यहाँ की सरकारों को अस्थिर भी करते रहे हैं. यहीं कारण है कि अब तक उत्तराखंड का उतना विकास नहीं हो पाया जितनी उम्मीदें थी. सन 2000 से लेकर अब तक के सरकारों के कार्यकाल पर नजर डाला जाये तो ये पता चलता है कि यहाँ की सरकारें कितनी अस्थिरता का शिकार होती रही हैं.

किसी भी राज्य के समुचित एवं समावेशी विकास के लिए वहां पर सरकारों का स्थिर होना और सत्ता के केन्द्रों का माफियाओं एवं दलालों से मुक्त होना अनिवार्य है. इसी को ध्यान में रखते हुए 18 मार्च, 2017 को जब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली तभी उन्होंने भ्रष्टाचारियों, माफियाओं एवं दलालों पर नकेल कसने की अपनी मंशा जाहिर कर दी थी. सत्ता सँभालने के कुछ ही माह बाद NH-74 एवं समाज कल्याण छात्रवृत्ति घोटाले पर उनके द्वारा उठाये गए कदम को इसकी बानगी के तौर पर देखा जा सकता है. फिर सीएम त्रिवेंद्र रावत ने ट्रांसफर एक्ट बनाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग के गोरखधंधे पर भी रोक लगा दी और शासन-प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने एवं जवाबदेही तय करने के लिए ई-ऑफिस को बढ़ावा दिया.

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को राज्य की बागडोर संभाले हुए चार साल होने वाले हैं और इन चार वर्षों में माफिया एवं दलाल  मिलकर लगातार उनके खिलाफ चक्रव्यूह रचने का प्रयास करते रहे हैं लेकिन त्रिवेंद्र सिंह रावत उनके चक्रव्यूह में फंसने की बजाय अर्जुन की भांति उनसे लड़ते रहे हैं. षड्यंत्रकारियों से लड़ते हुए भी  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने इस कार्यकाल में राज्य के विकास का एक नया खाका खींचा है-

जीरो टॉलरेंस की नीति अपना कर उन्होंने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया और शासन-प्रशासन से माफिया तत्वों का सफाया किया. सीएम हेल्पलाइन 1905 के माध्यम से शासन-प्रशासन तक लोगों की पहुँच को आसान किया है.

पहाड़ों से पलायन को रोकने एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु पलायन आयोग का गठन किया, जिसकी रिपोर्टें पहाड़ों के लिए नीतियां बनाने में काफी कारगर सिद्ध हो रही है.

देवभूमि उत्तराखंड में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. श्रद्धालुओं  की सुविधा के लिए और आधारभूत संरचना के विकास लिए चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन किया.

पहाड़ी राज्य के अनुरूप ही प्रदेशवासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए गैरसैण को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया और राजधानी के अनुरूप ही विकास कार्य बड़ी तेजी से किये जा रहे हैं.

चिकित्सा के क्षेत्र में भी सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा किये गए कार्य बेहद सराहनीय है. अटल आयुष्मान योजना उत्तराखंड के माध्यम से प्रदेश के सभी परिवारों को 5 लाख रूपये की निशुल्क चिकित्सा सुविधा देकर देश का पहला राज्य बनने का गौरव भी उत्तराखंड ने प्राप्त किया.

दिसंबर 2021  तक हर घर को नल से जोड़ने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में महज एक 1 रूपये में पानी का कनेक्शन किया जा रहा है और सौभाग्य योजना के तहत 2.5 लाख से अधिक घरों को रोशन किया जा चुका है.

इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से अब तक 25 हजार करोड़ रूपये से अधिक का निवेश राज्य में हो चुका है और इससे भारी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिला है.

कोरोनाकाल में उत्तराखंड में वापस अपने घरों को लौटे प्रवासियों को यहीं रोजगार देने और आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का शुभारम्भ किया जिसके माध्यम से अब तक हजारों की संख्या में लोगों को रोजगार मिल चुका है.

 

 

 

 

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