कोरोना के घाव पर मरहम साबित होती मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना

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वैश्विक महामारी कोविड-19 (कोरोना) ने लोगों को काफी जख्म दिए. इससे लोगों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा लेकिन साथ ही इसने लोगों को अपनी जड़ों ( गांवों ) से फिर से जुड़ने का अवसर भी दिया. कोरोना ने जब रोजगार छीना तो दिल्ली-मुंबई जैसे अन्य नगरों-महानगरों ने पनाह देने से भी मना कर दिया. ऐसे में प्रवासियों को अपने गाँवों और अपने घरों ने ही पनाह दी. कोरोनाकाल में शहरों ने प्रवासियों के साथ जो बेगाना व्यवहार किया उसने कहीं न कहीं प्रवासियों के मन में गहरी ठेस पहुंचाई.

उत्तराखंड से पलायन कर चुके लाखों लोगों को कोरोना ने फिर से अपनी मातृभूमि आने को मजबूर किया. उत्तराखंड वापस आये प्रवासियों के मन में बेरोजगार होने का गम था और भविष्य की चिंता भी थी. ऐसे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तर्ज पर ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ बनाने का संकल्प लेते हुए मई 2020 में  ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ की शुरुआत की.

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ने किया आपदा को अवसर में बदलने का काम 

उत्तराखंड सालों से पलायन का दंश झेल रहा था और पहाड़ों पर रोजगार एवं मूलभूत सुविधाएँ न होने के कारण लगातार लोग पलायन कर रहे थे. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जबसे राज्य की कमान संभाली तभी से ही उत्तराखंड से पलायन को रोकने को लेकर काफी संजीदा थे. यही कारण है कि उन्होंने सितम्बर 2017 पलायन आयोग का गठन भी किया. जब कोरोना की आपदा के  कारण उत्तराखंड के लाखों प्रवासी बेरोजगार होकर अपने घरों को वापस आए तो उन्होंने अपनी इस महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना  के माध्यम से इस आपदा को अवसर में तब्दील करने का काम किया है. इस योजना के माध्यम से भारी संख्या में लोगों को रोजगार मिला है और साथ ही पलायन भी रुका है.

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना को शुरू हुए लगभग 6 माह व्यतीत हो चुके है और इतने कम समय में ही अब तक हजारों लोगों ने इस योजना के माध्यम से बैंकों से करोड़ों रूपये की सहायता पाकर अपना रोजगार शुरू कर चुके है. कोरोना ने  उत्तराखंड के प्रवासियों को बेरोजगारी एवं आर्थिकी के जो दर्द जख्म दिए थे वे अब धीरे-धीरे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से भरने लगे हैं और प्रवासी उत्तराखंडियों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौटने लगी हैं.

 

 

 

 

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