संयुक्त राष्ट्र मिशनों पर प्रभाव बढ़ाना चाह रहा चीन, अधिक सैनिकों को तैनात करने की बनाई योजना

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--FILE--Chinese peacekeepers line up during a departure ceremony before flying to South Sudan for UN peacekeeping missions at Jinan Yaoqiang International Airport in Jinan city, east China's Shandong province, 7 April 2015. China will contribute 8,000 troops for a United Nations peacekeeping standby force, China's President Xi Jinping told the United Nations General Assembly on Monday (28 September 2015), a move that could make it one of the largest players in U.N. peacekeeping efforts. Xi's pledge comes as China is trying to show it is a responsible international player amid concern over its growing military might and territorial disputes in the Asia-Pacific region. During a state visit to Washington on Friday, Xi agreed with U.S. President Barack Obama that both countries would increase their "robust" peacekeeping commitments. "China will join the new U.N. peacekeeping capability readiness system, and has thus decided to lead in setting up a permanent peacekeeping police squad and build a peacekeeping standby force of 8,000 troops," Xi said. No Use China. No Use France.

संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए, चीन ने शांति अभियानों के लिए जमीन पर अधिक सैनिकों को तैनात करने की योजना बनाई है। एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सूत्र ने कहा कि ऐसे मिशनों में भारत की भूमिका को कम करना भी इसका उद्देश्य है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के शांति बनाए रखने वाले अभियानों में वर्तमान में कुल 2,548 चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान तैनात हैं। अब बीजिंग ने 8,000 अतिरिक्त सैनिकों को अंतर-सरकारी संगठन मिशनों के लिए भेजने की योजना बनाई है।

वे शांति अभियानों के लिए भारत की तुलना में सैनिकों की संख्या को दोगुना करना चाहते हैं। भारतीय सेना हमेशा मांग में रही है और बहुपक्षीय शांति अभियानों में सेना की तैनाती में सबसे ज्यादा योगदान देती है। वर्तमान में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए कुल 5,424 कर्मियों को तैनात किया है। अब तक भारत ने संयुक्त राष्ट्र के 71 मिशनों में से 52 में दो लाख सैनिक भेजे हैं।

 

सूत्र ने कहा कि वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र मिशनों में तैनाती के मामले में चीन नौवें स्थान पर है और भारत पांचवें स्थान पर है। सैनिकों की तैनाती के मामले में बांग्लादेश का शीर्ष योगदान है। इसने शांति मिशन के लिए 6,726 लोगों को तैनात किया है, इसके बाद जमीन पर 6,725 सैनिकों के साथ इथियोपिया का नंबर आता है। रवांडा संयुक्त राष्ट्र मिशन में 6,363 सैनिकों के साथ तीसरे स्थान पर है और नेपाल 5,714 कर्मियों को भेजकर चौथे स्थान पर है।

एक शीर्ष सूत्र ने कहा, पीएलए की तैनाती आने वाले वर्षो में कितनी प्रभावी होगी, यह देखने की जरूरत है। क्योंकि वे व्यावसायिकता के मामले में खराब प्रतिष्ठा रखते हैं। सूत्रों ने यह भी कहा कि 2016 में चीनी सैनिकों ने प्रतिकूल स्थिति का सामना करने पर दक्षिण सूडान में अपनी पोस्ट का त्याग कर दिया था। दो राजनीतिक समूहों के बीच झड़पों के दौरान उनकी पोस्ट पर हमला किए जाने के बाद वे हजारों नागरिकों की मदद करने में विफल रहे थे। हालांकि चीन ने आरोपों को खारिज कर दिया था।

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