Tuesday , 3 April 2018

UP: सीएम योगी का दावा- इंसेफेलाइटिस की रोकथाम में नहीं होने देंगे धन की कमी

 मंथन न्यूज़ नेटवर्क : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज आश्वासन दिया कि इंसेफेलाइटिस की प्रभावी रोकथाम के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने इस बीमारी से बचने के लिए स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया. मुख्यमंत्री ने दस्तक एवं स्कूल चलो अभियान की शुरूआत करते हुए कहा कि इंसेफेलाइटिस समाप्त करने में उपचार और टीकाकरण के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी लेकिन रोकथाम के लिए स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है. ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र की स्वच्छता सुनिश्चित करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता कार्यक्रम से हम भारत को स्वस्थ और स्वच्छ बनाएंगे. इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए स्वच्छ पेयजल भी आवश्यक है. ग्राम प्रधानों के पास हैंडपंप की मरम्मत और नये हैंडपंप लगाने के लिए धन है. दस्तक अभियान के बारे में योगी ने बताया कि यह इन्सेफेलाइटिस के खिलाफ अभियान है.

गोरखपुर और बस्ती जोन के तहत आने वाले जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं. क्या इन क्षेत्रों के बच्चों को जीने का अधिकार नहीं है. मैं मानता हूं कि जो भी इस पृथ्वी पर जन्म लेता है, उसे जीने का अधिकार है.सबको इस कार्य में सरकार का सहयोग करने की आवश्यकता है . ‘ उन्होंने कहा कि सबके सहयोग से इन्सेफेलाइटिस के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा.

यह अभियान पूरे उत्तर प्रदेश में 15 दिन तक चलेगा और इस अभियान में यूनीसेफ एवं केन्द्र सरकार हमारे साथ है. स्कूल चलो अभियान के बारे में योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस अभियान के तहत स्कूली बैग और अन्य स्टेशनरी मुहैया करायी है. अप्रैल में बच्चों को कापी किताब भी मिलेगी. बच्चे खुशी से बिना किसी भय के स्कूल जा रहे हैं.

आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर पिछले 40 साल से इंसेफेलाइटिस की महामारी से जूझ रहा है. पिछले 40 साल में इस बीमारी के कारण 10,000 मौतें हो चुकी हैं. हर साल गोरखपुर जिले में हजारों मासूमों की मौत इस बीमारी के कारण हो रही है.

इंसेफेलाइटिस की वजह से हर साल पांच-छह सौ बच्चों को अपनी जिंदगी से महरूम होना पड़ रहा है. इसी साल की बात करें तो 2017 में अब तक इंसेफेलाइटिस के चलते करीब 200 बच्चों की मौत हो चुकी है. पिछले छह दिनों में तो 66 बच्चे दिमागी बुखार के चलते मौत के आगोश में समा गए. 1977 में पहली बार जापानी इंसेफेलाइटिस ने गोरखपुर में दस्तक दी थी. तब से पिछले 40 साल में करीब 10 हजार मासूम बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस के चलते हो चुकी है.