Newsmanthan Codes:-
Sunday , 26 February 2017

वरिष्ठ न्यायाधीश राजेश दयाल ने दारूल उलूम देवबंद को बताया भारतवर्ष की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

Home / STATE NEWS / Uttar Pradesh / Lucknow / वरिष्ठ न्यायाधीश राजेश दयाल ने दारूल उलूम देवबंद को बताया भारतवर्ष की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल
रिपोर्ट: गौरव सिघंल, वरिष्ठ पत्रकार, सहारनपुर मंडल

देवबंद-सहारनपुर (न्यूज मंथन)।
इलाहबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस राजेश दयाल खरे ने आज देवबंद पहुंचकर विश्व विख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारूल उलूम देवबंद का भ्रमण किया। जस्टिस राजेश दयाल ने दारूल उलूम में यहां के मोहतमिम (कुलपति) अबुल कासिम नोमानी बनारसी, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी तथा अन्य उलेमाओं से खास मुलाकात की।
इस दौरान जस्टिस राजेश दयाल ने दारूल उलूम की ऐतिहासिक इमारत की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि दारूल उलूम देवबंद भारतवर्ष की गंगा-जमुनी तहजीब की खास मिसाल है। न्यायाधीश राजेश दयाल खरे ने कहा कि दारूल उलूम देवबंद के विषय में उन्होंने बहुत कुछ सुना था। जिसके बाद उनकी काफी समय से देवबंद दारूल उलूम आने की इच्छा थी।
जस्टिस राजेश दयाल ने दारूल उलूम की विजिटिंग बुक में लिखा कि उन्होंने दारूल उलूम देवबंद के संदर्भ में जो सुन रखा था उससे कहीं ज्यादा बेहतर पाया। खरे ने लिखा कि दारूल उलूम की लाइब्रेरी में प्रत्येक धर्म की पुस्तकों के मौजूद होने से मुझे यहां पर गंगा-जुमनी तहजीब की मिसाल दिखाई दी।
दारूल उलूम के मेेहमानखाने में दारूल उलूम देवबंद के मोहतमिम (कुलपति)अबुल कासिम नोमानी बनारसी से खास मुलाकात करते हुए जस्टिस राजेश दयाल ने उनसे इस्लामी शिक्षा और यहां के इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी ली। दारूल उलूम के मोहतमिम अबुल कासिम नोमानी ने जस्टिस राजेश दयाल से बातचीत में कहा कि जंगे आजादी में उलेमा-ए-देवबंद  द्वारा दी गई बेमिसाल कुर्बानियां हिंदुस्तान की तारीख का अहम हिस्सा है।
मोहतमिम नोमानी ने जस्टिस राजेश दयाल को दारूल उलूम के इतिहास, इल्मी व तहजीबी रिवायतों, बुजुर्गों की सेवाओं, कुर्बानियों, यहां दी जाने वाली शिक्षा और पढ़ने वाले छात्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जस्टिस राजेश दयाल खरे ने कहा कि जो उन्होंने दारूल उलूम देवबंद के बारे में सुना एवं पढा यहां आकर उससे कही ज्यादा पाया। उन्होंने कहा कि दारूल उलूम देवबंद के उलेमा की देश की आजादी में दी गई कुर्बानियों को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दारूल उलूम भारत की आजादी का अहम हिस्सा है। जस्टिस राजेश दयाल ने इस दौरान दारूल उलूम में स्थित लाइब्रेरी का दौरा भी किया और हजारों वर्ष पुरानी पुस्तकों को देखकर हैरानी जताते हुए कहा कि दारूल उलूम वाकई में भारत वर्ष की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। इसके  बाद न्यायाधीश ने एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया पहुंचकर जमीयत उलेमा-ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात कर मस्जिद रशीदिया को भी देखा और अरशद मदनी से भी खास बातचीत की।
जस्टिस राजेश दयाल खरे के इस दौरे के दौरान उनके साथ सहारनपुर जिला जज उमेश चंद त्रिपाठी, सीजीएस पांडे, चैधरी, नरेश, ब्रज कौशिक एवं शिवनंदन एडवोकेट, तहसीन खां, मुफ्ती मोहम्मदुल्लाह कासमी, असजद राशिद हुसैन, मौलाना शाह आलम, मौलाना मुकीम कासमी, राशिद हुसैन एवं मौलाना मुर्तजा आदि मौजूद रहे।

loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *