Wednesday , 24 October 2018

पाक ने किया चीन से साढ़े छह हजार करोड़ का कर्ज लेने का फैसला

मंथन न्यूज़ नेटवर्क : पाकिस्तान इन दिनों एक साथ कई मुश्क्लिों से जूझ रहा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देने के लिए चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर वह कमजोर विदेशी मुद्रा भंडारण की समस्या से भी दो चार हो रहा है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान चीन से करीब साढ़े छह हजार करोड़ का कर्ज लेने वाला है। पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी एक खबर के मुताबिक, घटते विदेशी मुद्रा भंडारण के चलते पाकिस्तान की सरकार लोन टर्म शीट्स की छानबीन कर रही थी। अब उसने साढ़े छह हजार करोड़ का कर्ज लेने का फैसला किया है। इस संबंध में पाकिस्तान और चीन के बीच मार्च में समझौता होना था।
पाकिस्तान पहले भी चीन से कर्ज ले चुका है। बीते तीन महीनों में पाकिस्तान ने चीन के बैंक ICBC से कई बार करोड़ों का कर्ज लिया था। सिर्फ चीन ही नहीं, सऊदी अरब से भी पाकिस्तान कर्ज ले चुका है। साल 2014 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 1.5 अरब डॉलर दिए थे। चीन की तरफ से पाकिस्तान को लगातार मिल रही आर्थिक मदद बड़ी चिंता का विषय है। एक तरफ आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली पेरिस की संस्था FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है, वहीं चीन पाकिस्तान का मददगार बनकर खड़ा हुआ है।
मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड और आतंकी संगठन जमात-उद-दावा का सरगना हाफिज मोहम्मद सईद धड़ल्ले से पाकिस्तान में अपना काम कर रहा है। जमात-उद-दावा और एफआईएफ जैसे आतंकी संगठनों पर अमेरिका के प्रतिबंध लगाने के बाद खुद पाकिस्तान ने दावा किया था कि हाफिज सईद और दोनों संगठनों की संपत्ति और उनके अकाउंट सील कर दिए गए हैं। इसके बावजूद हाफिज सईद और उसके सहयोगी दोनों हेडक्वार्टरों में अपना डेरा डाले हुए हैं।
भारत और अमेरिका जैसे अन्य देशों के दबाव के चलते पाकिस्तान ने कुछ समय पहले ही अपने एंटी टेरेरिज्म ऐक्ट में बदलाव किया था। इसके तहत पाकिस्तान को उन आतंकी संगठनों और लोगों के बैंक अकाउंट और ऑफिस बंद करने थे जिन्हें यूएन सिक्योरिटी काउंसिल ने बैन किया है। इसमें हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा का भी नाम था, लेकिन अब जिस तरह से हाफिज खुलेआम पाकिस्तान में अपने ऑफिस का उपयोग कर रहा है, जाहिर है पाकिस्तान ने कहीं न कहीं झूठ बोला है।