Monday , 24 June 2019

सेल्फी के चक्कर में जान गंवाते युवा…

नरेन्द्र भारती (स्वतंत्र पत्रकार) 

देश में संेल्फी के चक्कर में युवाओं व पर्यटको की मौतों का आंकडा बढता ही जा रहा है हर रोज ऐसे दर्दनाक हादसों से आत्मा सिहर उठती है कि कुछ लोग जान-बूझकर मौत के आगोश में समाते जा रहे है। एक घटना कुल्लु में घटित हुई कुल्लु की मनीकर्ण घाटी में पार्वती नदी के किनारे दिल्ली का एक पर्यटक सेल्फी लेते नदी में गिर गया और पानी के तेज बहाब में बह गया।अभी तक उसकी लाश नहीं मिल पाई है।समझ नहीं आता की देश के युवा सेल्फी लेते समय इतने अंधे कैसे हो जाते है कि अपनी जान जोखिम में खुद डाल देते है और असमय ही बेमौत मारे जा रहे है।ऐसी त्रासदियां असमय ही घर के चिरागों को बूझा रही है अगर इन मामलो पर संज्ञान लिया जाए। लापरवाही के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। गत वर्ष हिमाचल प्रदेश में सेल्फी के चक्कर में एक छात्रा को जान से हाथ धोना पड़ा था तथा दूसरी को बचा लिया गया था। यह दोनो छात्राएं शिमला के सुन्नी क्षेत्र में कोलडैम के समीप सेल्फी ले रही थी कि अचानक एक छात्रा का पांव फिसला और वह डूब गई दूसरी छात्रा उसे बचाते समय डूबने लगी मगर बचाव दल के सदस्यों ने उसे बचा लिया था। ऐसे दर्दनाक हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले महिने चलती ट्रेन के साथ सेल्फी लेने के चक्कर में बंगलुरु के पास तीन युवओं की दर्दनाक मौत हो गई थी यह हादसा बंगलुरु से करीब तीस किलोमीटर दूर बिदादी के पास हुआ था जहां तीन लड़के सेल्फी लेने के चक्क्र में चलती ट्रेन की चपेट में आ गए थे।और बेमौत मारे गए थे ।इनकी उम्र अभी 16 से 18 साल के बीच थी।कुछ लोगों ने इन युवाओं को तस्वीरे खीचते देखा था।इनमें दो युवा कालेज के छात्र थे और एक ने पढाई छोड़ दी थी। कुछ समय पहले वर्धा में नदी में विर्सजन के समय गणेश की मूर्ति के साथ सेल्फी लेनें के चक्क्र में तीन छात्रों की डुबकर मौत हो गई थी ।अब इसे लापरवाही कहे या कुछ और यह अहम सवाल है कि अपनी ही लापरवाहियों के कारण डूबते जा रहे है।सेल्फी के चक्क्र में अपनी जान से हाथ धो बैठते है। देश में घटित हो रहे ऐसे हादसों के लिए प्रशासन व पुलिस भी जिम्मेवार है।हर साल ऐसे हादसों में लोग मारे जाते है। मगर प्रशासन की तन्द्रा हादसे के आद ही टूटती है।अगर प्रशासन सर्तक होता तो श्रध्दालू डूबकर नहीं मारे जाते।अब प्रसाशन सक्रिय हो गया है मगर अब बहुत देर हो चुकी है।अब प्रशासन लापता लोागों की तलाश में लाखों रुपया खर्च कर देगा अगर पहले ही सर्तकता बरती होती तो ऐसे हादसे नहीं होते। ऐसे हादसे व्यवस्था की पोल खोलते है। देश मे समय-समय पर ऐसे हादसे होते रहते है मगर सबक न सीखना लोगों की आदत बन गई हैयह कोई पहला हादसा लहीं है हर रोज सेल्फी की वारदातें हो रही है।समाचार पत्रों में प्रकाशित आंकडों के मुताबिक 10 जुलाई 2017 को नागपुर में संेल्फी लेते 8 लोगों की मौत हो गई थी।उसके बाद भी इन हादसों में कमी तो नहीं आई पर वुद्वि जरुर हुई है।27 जुलाई को मध्यप्रदेश में भी संेल्फी लेते समय चार युवाओं की अकाल मौत हुई थी।इससे पहले 14 जुलाई को उतराखंड के एक दो प्रेमीयों की सेल्फी लेते समय मौत हो गई थी। 16 अप्रैल 2016 को सहारनपुर में रेलवे क्रासिंग पर सेल्फी लेते समय एक 16 साल के बच्चे की दर्दनाक मौत हाु गई थी।9 जनवरी 2015 को जम्मू में सेल्फी लेने के चक्कर में एक युवक की मौत हो गई थी।2015 में इजराइल के एक पर्यटक की सेल्फी लेते समय मौत हांे गई थी।2015 में ही जापान के एक पर्यटक की थी सेल्फी लेते समय मौत हो गई थी। 2015 में मथ्ुारा में तीन युवाओं की रेलवे ट्रैक पर सेल्फी लेनें के चक्कर में मारे गए थे।2014 में ऐसी ही एक घटना हुई थी जिसमें एक 15 साल के बच्चे की मौत हुई थी। ।प्रशासन को इन हादसों से संज्ञान लेना होगा तथा इन हादसों पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाने होगें क्योकि ऐसी बारदातें बहुत ही खौफनाक है। मानव जीवन बहुत ही दुर्लभ है।इन हादसों में कई इकलौते चिराग असमय ही दुनिया से रुखस्त हो रहे है।कहते है कि जानबूझकर गलती करना बहुत ही गलत है।अगर युवा जरा सा संभलकर चलते तो जिन्दगी से हाथ न धोते ।जान की परवाह न करते हुए खुद ही मौत को दावत दे रहे है इसमें किसे कसूरवार मानें।यह एक यक्ष सवाल है जिसका जबाब ढूढना होगा।देश में हो रहे इन हादसों पर समाज को चिंतन करना होगा।युवा आज मस्ती में ऐसे कार्यो को अंजाम दे रहा है कि इन युवाओं पर आ बैल मुझे मार की कहावत सटीक बैठती है।प्रशासन को इन बढते हादसांे पर लगाम लगाने के लिए कारगर कदम उठाने होगें तथा रेलवे विभाग को भी इन हादसों को अनदेखा नहीं करना चाहिए अगर पहले ही सर्तकता बरती होती तो आज युवा पर नकेल ले जाती और बेमौत न मारे जाते ।प्रशासन को ऐसे बिगडैलों पर कानूनी कारवाई करनी चाहिए ।अगर पुलिस प्रशासन ऐसे लोगों पर शिकंजा कसे तो इन हादसों केा रोका जा सकता है।अगर अब भी इन हादसों पर संज्ञान नहीं लिया तो हर रोज घरों के चिराग अस्त होते रहेगें ।युवाओं केा भी इन हादसों से सीख लेनी चाहिए। समाज के बुद्विजीवी लोगों को इन वारदातों पर मंथन करना होगा।अभिभावको को अपने लाडलों को भी को ज्ञान देना चाहिए कि वह सेल्फी के चक्कर में अपनी जान न गवाएं क्योकि मानव जीवन बार-बार नहीं मिलता। देश में हुए इन दर्दनाक हादसों से भी अगर अब भी युवाओ केा होश नहीं आया तो हर रोज सेल्फी लेने ंचक्क्र में बेमौत मरते रहेगें । वक्त अभी संभलने का है।