Thursday , 18 October 2018

गंगा दशहरा : हरिद्वार में उमड़े श्रद्धालु, हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड में लगाई आस्था की डुबकी

मंथन न्यूज़ नेटवर्क : ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। गुरुवार को गंगा दशहरा (गंगा दशमी) पर हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। हरिद्वार में गंगा दशहरा के मौके पर आस्था का सैलाब उड़ पड़ा है। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के साथ अन्न-वस्त्रादि का दान, जप-तप-उपासना और उपवास किया। माना जाता है कि इससे दस प्रकार के पाप (तीन प्रकार के कायिक, चार प्रकार के वाचिक और तीन प्रकार के मानसिक) दूर होते हैं।

गंगा दशहरे पर देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान किया। हरिद्वार गंगा घाट हर हर गंगे के जयघोष से सुबह से गूंजने लगी। गंगा दशहरे का स्नान तड़के से शुरू हो गया था। जैसे-जैसे दिन चढ़ता रहा वैसे-वैसे गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी।
गंगा दशहरे के दिन पितृ तर्पण का भी विशेष महत्व है। अनेक घाटों पर श्रद्धालुओं ने पित्रों को तर्पण दिया। गंगा के घाटों पर भक्तों ने पुरोहितों और पंडितों से धरती पर गंगा अवतरण की कथा भी सुनी। वहीं स्नान के मद्देनजर गंगा तट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, लोकनाथ घाट, कुशावर्त घाट पर पुलिस बल के साथ गोताखोर भी तैनात हैं।

ये है मान्यता 

गंगा दशमी पर मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा भागीरथी की तपस्या से प्रसन्न होकर लोगों के पाप तारने धरती पर आई थी। आज गुरुवार को गंगा दशहरा है। इस बार गंगा दशहरा में गर करण, वृषस्थ सूर्य, कन्या का चन्द्र होने से अद्भुत संयोग बन रहा है। जो महाफलदायक है। इस बार योग विशेष का बाहुल्य होने से इस दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत, और उपवास आदि करने का बहुत ही महत्व है। इस वर्ष गंगा दशहरा ज्येष्ठ अधिकमास में होने से पूर्वोक्त कृत्य शुद्ध की अपेक्षा मलमास में करने से अधिक फल होता है। दशहरा के दिन गंगा घाट पर दश प्रकार स्नान करके, शिवलिंग का दस संख्या के गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और फल आदि से पूजन करके रात्रि को जागरण करें तो अनन्त फल मिलेगा। मंहत आलोक गिरी ने बताया कि आज के दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलेगी।

गंगा पूजन विधि 

गंगा दशहरा के दिन हरकी पैड़ी में गंगा स्नान अथवा सामर्थ्य न हो तो समीप के किसी भी जलाशय या घर के शुद्ध जल से स्नान करके सुवर्णादि के पात्र में त्रिनेत्र, चतुर्भुज, सर्वावयवभूषित, रत्नकुम्भधारिणी, श्वेत वस्त्रादि से सुशोभित तथा वर और अभयमुद्रा से युक्त श्रीगंगा जी की प्रशान्त मूर्ति अंकित करें। फिर ‘ऊँ नम: शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम:’ से आवाहनादि षोडषोपचार पूजन करें तथा इन्ही नामों से ‘नम:’ के स्थान में स्वाहायुक्त करके हवन करे। फिर दस फल, दस दीपक और दस सेर तिल- इनका ‘गंगायै नम:’ कहकर दान करे। इतना करने से सब प्रकार के पाप समूल नष्ट हो जाते हैं और दुर्लभ- सम्पत्ति प्राप्त होती है।