Monday , 20 May 2019

चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण करने की तैयारी में इसरो

मंथन न्यूज़ नेटवर्क : भारत के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 से इतिहास रचने की कोशिश कर रहे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने कहा कि वह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में यान का प्रक्षेपण करने की कोशिश करेगा।  गौरतलब है कि अब तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर किसी ने अंतरिक्ष यान उतारने की कोशिश नहीं की है।

इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने बताया, ‘आज की तारीख तक किसी ने भी क्षेत्र में यान उतारने की कोशिश नहीं की। यह (चंद्रमा की) विषुवत रेखा के पास है। हम पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में यान (चंद्रयान-2) उतारने की कोशिश करेंगे।’

इस हफ्ते की शुरुआत में इसरो ने कहा कि चंद्र मिशन के सभी तीन मॉड्यूल – ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) – जुलाई में निर्धारित प्रक्षेपण के लिए तैयार हो रहे हैं और लैंडर सितंबर की शुरुआत में चंद्रमा की सतह पर उतर सकता है।

सिवन ने पत्रकारों को बताया कि इसरो ने जीएसएलवी मैक-3 रॉकेट के जरिए अंजाम दिए जाने वाले इस मिशन के लिए नौ जुलाई से 16 जुलाई तक का वक्त तय रखा है और चंद्रमा पर यान को छह सितंबर को उतारे जाने की संभावना है।

गौरतलब है कि इसरो मिशन चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग के लिए पूरी तरह से तैयार है। चांद पर पहुंचने के नए मिशन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस मिशन में इसरो की ओर से एक ऑरबिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर प्रज्ञान भेजे जाएंगे।

इसरो ने इस मिशन को लेकर एक ट्वीट करते हुए लिखा, ‘हम सबसे रोमांचक मिशनों में से एक चंद्रयान 2 के लिए तैयार हैं। इसे 9-16 जुलाई के बीच लॉन्च किया जाएगा और चांद पर 6 सितंबर को इसके लैंड होने की उम्मीद है।

चंद्रयान 2 में जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट तीन मॉड्यूलों को लेकर जाएगा। इसमें आर्बिटर (कक्षा में चक्कर लगाने वाला सैटेलाइट), विक्रम नाम का लैंडर और प्रज्ञान नाम का रोवर शामिल हैं।’

खास बात ये है कि मिशन चंद्रयान 2 का रोवर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। यह हिस्सा अभी भी अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए कौतुहल से भरा हुआ है और इस हिस्से के बारे में ज्यादा रिसर्च नहीं की गई है।

रोवर प्रज्ञान को लैंडर विक्रम के अंदर रखा जाएगा। विक्रम का काम प्रज्ञान को चांद की सतह पर सुरक्षित उतारना होगा।

इसके साथ एक आर्बिटर चांद की कक्षा में लगातार चक्कर लगाता रहेगा। यह सतह पर मौजूद रोवर से संपर्क में रहेगा। आर्बिटर की मदद से इसरो को लगातार चांद पर प्रज्ञान- रोवर की गतिविधियों की जानकारियां मिलेंगी।