Friday , 13 April 2018

उत्तराखंड के 71 में से 54 विधायकों ने नहीं दिया संपत्ति ब्योरा

सत्ता संभालने के दिन से ही भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता की बात भले ही सरकार कह रही हो, मगर इसे लेकर गंभीरता नजर नहीं आ रही। सूचना के अधिकार में मुहैया कराई गई जानकारी इसे तस्दीक करती है। राज्य के 71 विधायकों में से 54 ने अभी तक अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है। इनमें मुख्यमंत्री, छह मंत्री और नेता प्रतिपक्ष भी शामिल हैं। अब तक तीन मंत्रियों समेत 17 विधायकों ने ब्योरा दिया है। हालांकि, इनमें भी केवल सात ने ही तीन माह की समयावधि के भीतर जानकारी उपलब्ध कराई।

 उत्तराखंड बनने के बाद से बड़ी संख्या में विधायक व मंत्री इस परंपरा का निर्वह्न नहीं कर रहे, जबकि पारदर्शिता व भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए ऐसा किया जाना जनहित में आवश्यक है। मौजूदा विधायक भी संपत्ति ब्योरा देने में गंभीर नहीं दिख रहे। आरटीआई कार्यकर्ता नदीमुद्दीन को सूचनाधिकार के तहत बीती 28 मार्च को विस के लोक सूचना अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी पर गौर करें तो विधायकों को जून 2017 तक विवरण देना था।

अभी तक केवल तीन कैबिनेट मंत्रियों सहित 17 विधायकों ने ही संपत्ति का विवरण दिया है। इनमें से सात विधायकों ने निर्धारित समयावधि के भीतर ब्योरा दिया तो चार के विवरण में तारीख दर्ज नहीं है। छह विधायकों ने पिछले वर्ष जुलाई से इस वर्ष फरवरी तक ब्योरा उपलब्ध कराया। वहीं, मुख्यमंत्री समेत सात मंत्रियों के साथ ही नेता प्रतिपक्ष और अन्य विधायकों ने संपत्ति का ब्योरा अभी तक नहीं दिया है।

इन मंत्री, विधायकों ने दिया ब्योरा

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ.हरक सिंह रावत व यशपाल आर्य, विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, विधायक संजीव आर्य, धन सिंह नेगी, केदार सिंह रावत, गणेश जोशी, बलवंत सिंह भौंर्याल, विनोद चमोली, हरभजन सिंह चीमा, खजानदास, कैलाश चंद्र गहतौड़ी, पूरन सिंह फत्र्याल, सुरेंद्र सिंह जीना व प्रीतम सिंह पंवार।

इन्होंने नहीं दिया ब्योरा

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, काबीना मंत्री प्रकाश पंत, मदन कौशिक, अरविंद पांडेय व सुबोध उनियाल, राज्यमंत्री रेखा आर्य व डॉ.धन सिंह रावत, नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृद्येश के अलावा 47 विधायक।

रिमाइंडर भी इस संबंध में भेजे जाते रहे हैं

विधानसभा सचिव जगदीश चंद्र का कहना है कि माननीयों की ओर से संपत्ति का विवरण देने की परंपरा निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। विवरण लगातार आता रहता है। पूर्व में रिमाइंडर भी इस संबंध में भेजे जाते रहे हैं।

मैं अपनी संपत्ति का ब्योरा दे चुका हूं

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल का कहना है कि मैं अपनी संपत्ति का ब्योरा दे चुका हूं। स्वस्थ परंपरा के तहत सभी विधायकों को संपत्ति ब्योरा विधानसभा सचिव को उपलब्ध कराना चाहिए। इससे जनता में विश्वास और बढ़ेगा।