Sunday , 15 September 2019

राज्यों की विशेषताओं को आगे बढ़ाने की जरूरत : PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों की सांस्कृतिक तथा सामाजिक विविधता हमारी ताकत है और हर राज्य की इन्हीं विशेषताओं तथा उनकी शक्तियों की पहचान कर देश को आगे बढने की आवश्यकता है। मोदी ने सोमवार को यहां नवनिर्मित गुजरात भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत के अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक ताकत ही इस देश को महान तथा ताकतवर बनाती है। इस विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए देश के हर हिस्से तथा हर राज्य की विशेषताओं तथा शक्तियों की पहचानकर आगे बढ़ाने तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर, लेह-लद्दाख तथा पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ ही विंध्य के आदिवासी  अंचलों से लेकर दक्षिण के समुद्री विस्तार तक भारत के पास दुनिया को देने के लिए प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है लेकिन इसे बढावा देने और इसके वास्ते अपनी सक्रियता बढ़ाने की जरूरत है। मोदी ने कहा ‘‘गुजरात का यह नया सदन भले ही मिनी गुजरात का मॉडल हो, लेकिन ये न्यू इंडिया की उस सोच का भी प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसमें हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को, हमारी परंपराओं को आधुनिकता से जोड़कर आगे बढ़ने की बात करते हैं। नए सदन में गुजरात में निवेश आकर्षित करने के लिए, गुजरात में उद्योगों के लिए, एक अहम सेंटर बने इसके लिए नई व्यवस्थाएं की गई हैं। मुझे विश्वास है कि इन सुविधाओं से गुजरात में निवेश के इच्छुक भारतीय और विदेशी निवेशकों को और अधिक सुविधा मिलेगी।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास के लिए गुजरात की ललक को उन्होंने करीब डेढ़ दशक तक मुख्यमंत्री के नाते बहुत करीब से देखा है लेकिन बीते पांच वर्षों में गुजरात ने विकास के अपने सफर को और तेज किया है। गुजरात की विकास दर हाल के वर्षों में दस प्रतिशत से अधिक रही है। केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने के कारण गुजरात की कई अड़चने दूर हुई हैं। गुजरात में ढांचागत विकास को बढावा देने के लिए महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा ‘‘मुझे खुशी है कि जल संचयन हो या गांव-गांव जल पहुंचाने का अभियान, गुजरात अच्छा काम कर रहा है। ऐसे ही प्रयासों से हम 2024 तक हर घर जल पहुंचाने में सफल होंगे, इसका मुझे पूरा विश्वास है।’’ मोदी ने याद दिलाया कि देश को ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ से मुक्ति दिलानी है और विश्वास जताया कि गरवी गुजरात सदन इसमें भी एक मिसाल बनेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कई राज्यों के सदन हैं और वे अतिथि गृह ही न बने रहें बल्कि उस राज्य के प्रतिनिधि हों और देश और दुनिया से उस राज्य की विविवधाओं के बारे में संवाद करें।