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Sunday , 26 February 2017

यूपी का ऐसा गांव जहां आज भी दलितों के लिए यह करना जरूरी है वरना…

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बीते जमाने की एक ऐसी परम्परा के बारे में आपने किस्से, कहानियों में जरूर पढ़ा या सुना होगा. जिसमे कुछ जाति के लोगों को छुआ छुत से दो चार होना पड़ता था. जिसके तहत नल या कुएं से पानी ना भरना, घर में घुसने से पहले जूते चप्पलों को सिर पर रखना या फिर चारपाई पर न बैठने जैसे अत्याचारों को झेलना पड़ता था. लेकिन वक्त बदला, समाज बदला और ऐसी परम्पराएं पीछे छूट गई. मगर मुज़फ्फरनगर का एक ऐसा गांव अभी भी कुछ ऐसी परम्पराओं के भंवर में फसा हुआ हैं. जहां दलितों को समान अधिकार नहीं हैं.

देश की राजधानी दिल्ली से महज 80 किलोमीटर दूर दिल्ली-देहरादून राष्ट्रिय राजमार्ग (NH-58) पर बसा जनपद मुज़फ्फरनगर का गांव भूप खेड़ी आज भी सदियों पुरानी परम्पराओ से जकड़ा हुआ है. इस गांव में आज भी दलितों को समान अधिकार नहीं है. आज भी इस गांव में दलितों को सार्वजानिक सैलून (हज्जाम की दुकान) पर ना तो बाल कटवाने और ना ही शेव बनवाने की आजादी है. बल्कि अगर कोई हज्जाम इस रिवाज को तोड़ने का प्रयास करता है तो उसे या तो दबंगो का कहर झेलना पड़ता है या फिर अपनी दुकान पर ताला लगाना पड़ता है.

ऐसे में दलित समाज के लोगों को आस-पड़ोस के गांव में जाकर अपने बाल कटवाने पड़ते हैं. हैरत की बात ये है कि सदियों से चली आ रही ये परंपरा गांव में मौजूद दलित समाज के पूर्वज ही नहीं बल्कि वर्तमान पीढ़ी भी इस अत्याचार को बदस्तूर झेल रही है. लेकिन अब कुछ युवाओं ने इस परंपरा को तोड़ने का बीड़ा उठा लिया है और ये नौजवान अपने समाज को सभाएं कर जागरूक कर रहे हैं.

कुल मिलाकर दलित समाज इस सामाजिक अपराध के खिलाफ बगावत पर उतर आये हैं और गांव के दबंगों का विरोध कर प्रशासन से संविधान के अनुसार जीने का हक़ मांग रहे हैं. वहीं इस मामले की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने पूरे मामले की जांच कर कार्यवाई करने की बात कर रहे हैं.

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