Tuesday , 21 November 2017

मेरा सपना है ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना: कुहू

उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय महिला शटलर कुहू गर्ग ने कहा कि क्रिकेट की तरह बैडमिंटन में स्पॉन्सरशिप मिलने लगे तो खिलाड़ियों को और बेहतर प्रदर्शन करने में सहयोग मिलेगा। प्रदेश में बैडमिंटन खिलाड़ियों को तराशने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऐकेडमी खोलने की जरूरत है। कुहू का लक्ष्य 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतना है।

राजधानी देहरादून निवासी कुहू गर्ग ने हाल ही में ग्रीस ओपन इंटरनेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप में मिक्स डबल्स वर्ग में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता है। उत्तरांचल प्रेस क्लब की ओर से आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में कुहू ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में प्रदेश में खेलों की अवस्थापना सुविधाओं का विकास हुआ है। सरकार को चाहिए कि यहां ऐसी ऐकेडमी स्थापित हो जिसमें बेहतर कोच, ट्रेनर, फिजियो सहित अन्य सुविधाएं हों। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अभिभावकों को देते हुए कहा कि अगर अभिभावक बच्चों को खेल के प्रति प्रेरित करते तो यहां से और भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहुंचेंगे।

डबल्स व मिक्स्ड डबल्स में अलग से होने चाहिए कोच 

कुहू गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डबल्स व मिक्स्ड डबल्स में देश का खास प्रदर्शन नहीं हैं। हर स्तर के खिलाड़ियों को स्पर्धा के अनुसार कोच मिलने चाहिए जिससे एक कोच पर दबाव कम हो सके। फिलहाल कुहू का फोकस नवंबर में होने वाली सीनियर नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप पर है। साथ ही उनका लक्ष्य अगले ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है। इससे पूर्व कार्यक्रम में उत्तरांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष नवीन थलेड़ी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर कुहू का स्वागत किया। क्लब के महामंत्री भूपेंद्र कंडारी कुहू के करियर के बारे में जानकारी दी। इस दौरान अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था व उत्तरांचल स्टेट बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार, बैडमिंटन कोच दीपक रावत, दीपक नेगी आदि मौजूद थे।

बार-बार बदलाव से पड़ता है असर 

कुहू ने कहा कि वर्तमान में मिक्स्ड डबल्स में उनके जोड़ीदार रोहन कपूर हैं जिनके साथ उन्होंने ग्रीस ओपन में खिताब जीता। उन्होंने कहा कि रोहन के साथ शुरुआत में दिक्कतें हुई। जोड़ीदार के खेल को समझने के लिए समय लगता है। बार-बार खिलाड़ी बदलने से रैंकिंग पर असर पड़ता है।

नौ साल की उम्र से किया खेलना शुरू 

कुहू ने 2007 में नौ साल की उम्र में बैडमिंटन का ककहरा सीखना शुरू किया। शुरूआती दौर में बैडमिंटन कोच दीपक रावत, दीपक नेगी व डीके सेन ने कुहू को तराशा। कुहू ने दिल्ली में मधुमिता बिष्ट अकादमी में कोच विक्रम बिष्ट से भी प्रशिक्षण लिया। वर्तमान में वह हैदराबाद में गोपीचंद ऐकेडमी में प्रशिक्षण ले रही है।

कुहू की उपलब्धियां 

-2012 में सुशांत चिपलकट्टी टूर्नामेंट में कांस्य पदक

-2013 में जारुम बांडूंग ओपन इंडोनेशिया में मिश्रित युगल वर्ग में कांस्य पदक

-2014 में सुशांत चिपलकट्टी टूर्नामेंट में मिश्रित युगल व अंडर-19 बालिका युगल वर्ग में स्वर्ण पदक

-योनेक्स बेलजियन जूनियर इंटरनेशनल में स्वर्ण

-स्विस जूनियर ओपन में कांस्य

-2016 में मॉरिसस में महिला युगल वर्ग में कांस्य

-टाटा इंटरनेशनल चैलेंज मुंबई में मिक्स्ड डबल्स में रजत

-2017 में ग्रीस ओपन चैंपियनशिप में मिक्स्ड डबल्स में स्वर्ण