Monday , 24 June 2019

चाय वाले के बेटे ने पहली बार में ही पास की UPSC की परीक्षा, बना IAS अधिकारी

जैसलमेर के गांव सुमालियाई के रहने वाले देशल ने साल 2017 में यूपीएससी की परीक्षा को पास किया था। यहां तक पहुंचना उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था। देशल अपने 7 भाई-बहनों में दूसरे पढ़े-लिखे बच्चे हैं। उन्होंने आईआईटी-जबलपुर से बीटेक किया है। देशल को आईआईएस बनने की प्रेरणा उनके बड़े भाई से मिली थी।

देशल के मुताबिक जब वो दसवीं में थे तब उनके भाई इंडियन नेवी में सेवा दे रहे थे। देशल के भाई की मौत ड्यूटी के दौरान ही हो गई थी। उनके भाई अक्सर उन्हें सेना की कहानियां सुनाया करते थे। भाई उनसे कहते थे कि तुम या तो सेना में जाना या फिर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में। देशल ने अपने भाई से प्रेरित होकर सिविल सेवा परीक्षा में बैठने का फैसला किया।

द बेटर इंडिया के मुताबिक देशल को इस परीक्षा में पहली बार में क्रैक कर लिया था। देशल साल 2017 में  IFS में 5वीं रैंक और 2018 में IAS AIR 82वीं रैंक हासिल की थी। घर में देशल के माता-पिता ही नहीं बल्कि छोटे भाई भी पढ़े-लिखे नहीं है। भाईयों ने बेहद कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था।  

छोटी सी चाय की दुकान से चलता था घर का खर्च

देशल का घर काफी साधारण था, उनके पिता चाय की स्टॉल लगाया करते थे। देशल के मुताबिक उनके पास जमीने थी लेकिन हम उस पर कुछ कर नहीं पाते थे। कई सालों तक खेती करके घर का गुजारा किया गया लेकिन बाद में परिस्थिती को देखते हुए साल 1989 से चाय स्टॉल लगाने का फैसला लिया। देशल के मुताबिक उनके जन्म से पहले पिता साल में एक या दो बार खेती करते थे और उसी से घर का गुजारा होता था। मेरे बड़े भाई भी पिता का साथ देने के लिए चाय स्टॉल पर उनका हाथ बंटाते थे लेकिन मुझे पहले से ही पता था कि मैं कुछ बड़ा चाहता हूं।

पिता को था देशल दान पर पूरा भरोसा

पिता के मुताबिक आईआईएस अधिकारी उनकी सोच और पकड़ दोनों से ही आगे है। देशल अक्सर मुझसे कहता था कि मैं जो भी बनूंगा वो आपकी पकड़ से बाहर होगा। यही नहीं देशल अपने पिता को अक्सर काम करने के लिए मना करते थे। उनके पिता मानते हैं कि देशल का साहस और दृढ़ संकल्प है  जिसने उसे यहां तक पहुंचाया। देशल कहते हैं कि अगर मुझे भरोसा नहीं होता तो मैं गांव में खेती या फिर कोई और काम करता।