चंद्रयान-2 से अलग हुआ विक्रम लैंडर

द्रयान-2 का विक्रम लैंडर सोमवार को सफलतापूर्वक ऑर्बिटर से अलग हो गया और इसके साथ ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने की यात्रा में  चंद्रयान-2 के हिस्से में एक और सफलता जुड़ गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ट्वीट किया,‘‘ चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर आज दोपहर बाद एक बजकर 15 मिनट पर सफलतापूर्वक ऑर्बिटर से अलग हो गया।’’ अगले 21 घंटे तक विक्रम लैंडर अपने ऑर्बिटर के पीछे-पीछे दो किमी प्रति सेकंड की गति से चांद का चक्कर लगाता रहेगा। अभी विक्रम लैंडर 119 किमी की एपोजी (चांद से सबसे कम दूरी) और 127 किमी की पेरीजी (चांद से अधिकतम दूरी) में चक्कर लगा रहा है। चंद्रयान-2 तीन हिस्सों से मिलकर बना है-पहला-ऑर्बिटर, दूसरा- विक्रम लैंडर और तीसरा- प्रज्ञान रोवर। विक्रम लैंडर के अंदर ही प्रज्ञान रोवर है, जो सॉफ्ट लैंडिंग के बाद बाहर निकलेगा। तीन सितंबर को सुबह 8.45 से 9.45 बजे के बीच विक्रम लैंडर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर को छोड़ नयी कक्षा में जाएगा। तब यह 109 किमी की एपोजी और 120 किमी की पेरीजी में चांद का चक्कर लगाएगा। इसे वैज्ञानिक भाषा में डिऑर्बिट कहते हैं यानी जिस दिशा में वह जा रहा था, उसके विपरीत दिशा में आगे बढ़ना। ऑर्बिटर से अलग होने के बाद विक्रम लैंडर दो किमी प्रति सेकंड की गति से ही चांद के चारों तरफ ऑर्बिटर के विपरीत दिशा में चक्कर लगाएगा। ऐसा इसलिए किया रहा हैं क्योंकि ऑर्बिटर चांद के चारों तरफ ऊपर 100 किमी की दूरी पर चक्कर लगाएगा लेकिन, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाने के लिए विक्रम लैंडर को अपनी दिशा बदलनी होगी। इसलिए उसे विपरीत दिशा में चांद का चक्कर लगाना होगा। इसरो वैज्ञानिक विक्रम लैंडर को चार सितंबर को अपराह्न तीन से चार बजे के बीच चांद के सबसे नजदीकी कक्षा में पहुंचाएंगे। इस कक्षा की एपोजी 36 किमी और पेरीजी 110 किमी होगी। दूसरी बार चांद की कक्षा बदलने यानी चांद के सबसे नजदीकी कक्षा में पहुंचने के बाद छह सितंबर तक विक्रम लैंडर के सभी सेंसर्स और पेलोड्स के सेहत की जांच होगी। प्रज्ञान रोवर के सेहत की भी जांच की जाएगी। छह एवं सात सितंबर को मध्य रात्रि के बाद 1:30 से 1.40 बजे के बीच विक्रम लैंडर 35 किमी की ऊंचाई से चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना शुरू करेगा। तब इसकी गति 200 मीटर प्रति सेकंड होगी। यह इसरो वैज्ञानिकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण काम होगा। देर रात 1:55 बजे विक्रम लैंडर दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद दो क्रेटर मैंजिनस-सी और सिंपेलियस-एन के बीच मौजूद मैदान में उतरेगा। करीब 6 किमी की ऊंचाई से लैंडर 2 मीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह पर उतरेगा और इसबीच 15 मिनट बेहद तनावपूर्ण होंगे। लैंडिंग के करीब दो घंटे के बाद विक्रम लैंडर का रैंप खुलेगा और इसी के जरिए छह पहियों वाला प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर उतरेगा। सात सितंबर को सुबह 5.10 बजे प्रज्ञान रोवर चांद की सतह पर चलना शुरू करेगा। वह एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से चांद की सतह पर 14 दिनों तक यात्रा करेगा। इस दौरान वह 500 मीटर की दूरी तय करेगा। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद से 100 किमी ऊपर चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर से प्राप्त जानकारी को इसरो सेंटर पर भेजेगा। इसमें आठ पेलोड हैं और इसके साथ ही इसरो से भेजे गए कमांड को लैंडर और रोवर तक पहुंचाएगा। लैंडर का नाम इसरो के संस्थापक और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। इसमें चार पेलोड हैं। यह 15 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा, इसकी शुरुआती डिजाइन इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद ने बनाया था। बाद में इसे बेंगलुरु के यूआरएससी ने विकसित किया। इससे पहले रविवार को अंतरिक्ष यान ने चन्द्रमा की पांचवी और अंतिम कक्षा में प्रवेश कर लिया था जिसके बाद आज लैंडर ‘विक्रम’ ऑर्बिटर से अलग हो गया। भारत के राष्ट्रीय ध्वज को लेकर जा रहा चंद्रचान-2 सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा तथा और उस दौरान प्रज्ञान नाम का रोवर लैंडर से अलग होकर 50 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर घूमकर तस्वीरें लेगा। इस मिशन में चंद्रयान-2 के साथ कुल 13 स्वदेशी मुखास्त्र यानी वैज्ञानिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। इनमें तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, राडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की सटीक दूरी का पता लगाना है। इसरो ने कहा कि इस अभियान के जरिये हमें चंद्रमा के बारे में  और अधिक जानकारी मिल सकेगी। वहां मौजूद खनिजों के बारे में भी इस मिशन से  पता लगने की उम्मीद है। चंद्रमा पर पानी की उपलब्धता और उसकी रासायनिक  संरचना के बारे में भी पता चल सकेगा। इस अभियान पर लगभग 1000 करोड़  रुपये खर्च हुए हैं। यह अन्य देशों द्वारा संचालित ऐसे अभियान की तुलना  में काफी कम है। यदि यह अभियान सफल रहता है तो भारत, रूस, अमेरिका और चीन  के बाद चांद की सतह पर रोवर उतराने वाला चौथा देश बना जायेगा। इस वर्ष  की शुरुआत में इजरायल का चंद्रमा पर उतरने का प्रयास विफल रहा था।